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स्वच्छ भारत मिशन

Updated: Mar 4, 2019

महात्मा गांधी ने कहा था कि स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह अपना लो कि वह आपकी आदत बन जाये। ऐसा नहीं है कि हम भारतीय कभी स्वच्छता को लेकर कभी सजग नहीं थे। लेकिन ज़रूरत थी तो एक सामूहिक प्रयास की। और वह सामूहिक प्रयास सामने आया स्वच्छ भारत मिशन / अभियान के द्वारा, जिसने सभी के दिमाग़ में स्वच्छता को लेकर एक भावना पैदा की। इस अभियान के मुख्य उद्देश्य थे खुले में शौच को रोकना,कूड़ा कचरे का सही प्रबंधन करके गंदगी से मुक्ति पाना। और इस अभियान की पूर्ति की अंतिम तारीख़ २ ऑक्टोबर २०१९ रखी गई। आज इस अभियान ४ साल पूरे हो चुके हैं। और जहाँ तक सवाल है इस अभियान का तो शायद हम उसे हासिल करने से दूर ही प्रतीत होते हैं। अभियान की शुरुआत मे झाड़ू लेकर रोड साफ़ करते हुए फ़ोटो और सेल्फ़ीस की एक बाढ़ सी आ गई लेकिन शायद हमने अभियान का मूल तो कहीं भुला ही दिया। जिस अभियान की प्राथमिकता कूड़ा प्रबंधनप्रभाधन और खुले में शौच को रोकना था, वह कुछ मुद्दों को तो भूल ही गई

१ नदियों को सफ़ाई २ वायु प्रदूषण ३ पीने के लिए साफ़ पानी ४ समुद्र में फेंका जा रहा कचरा

और इन सब मुद्दों पर आज भी हम वहीं हैं जहाँ पहले खड़े थे। नदियाँ आज भी गंदी हैं, नाले आज भी नियंत्रण से बाहर हैं वायु प्रदूषण अपने चरम पे है पीने के लिए साफ़ पानी नहीं है प्लास्टिक ने आधे देश को खा लिया है। घरों ने पेड़ों और जंगलो को निगल लिया है। पूरा देश अतिक्रमण का शिकार है और हम स्वच्छ भारत का ढिंढोरा पिटते फिरते हैं कितने शौचालय बने और कितने सिर्फ़ काग़ज़ों पर बने इसका कोई हिसाब नहीं है और अगर आप जानना  भी चाहो तो शायद डाटा और ज़मीनी हक़ीक़त कहीं मेल नहीं खाती। अगर सिर्फ़ झाड़ू लेकर फ़ोटो खिचाने से देश साफ़ हो सकता तो शायद आज हम स्वच्छ भारत में रह रहे होते.

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